सूर्यदेव (सूर्य भगवान) हिंदू धर्म में सर्वशक्तिमान और प्रमुख देवता हैं। उन्हें सभी जीवों के जीवन का स्रोत, प्रकाश और ऊर्जा के देवता माना जाता है। वे वेदों, पुराणों और उपनिषदों में अत्यंत महत्व रखते हैं।

🌞 1. सूर्यदेव का परिचय
- सूर्यदेव को सर्व जीवों के पालनहार माना जाता है।
- वे दिन और रात के चक्र, ऋतुओं और समय के नियंत्रक भी हैं।
- सूर्य = जीवनदायिनी ऊर्जा, जो पृथ्वी पर सभी प्राणियों के लिए अनिवार्य है।
👨👩👧👦 2. माता-पिता और परिवार
🔹 पिता – कश्यप ऋषि (Rishi Kashyap)
🔹 माता – अदिति (Aditi)
- सूर्यदेव अदितियों में से एक हैं।
🔹 पत्नी – संयुता/संयुक्ता या संज्ञा (Sanjna/Chhaya)
- संयुता के पुत्र: मनु (विष्णु पुराण के अनुसार), यमराज, यमुनाजी
- संज्ञा की छाया से जन्मे पुत्र: शनि देव, ग्रह आदि
🌟 3. सूर्यदेव का वाहन और स्वरूप
- वाहन: रथ, जो सात घोड़ों द्वारा खींचा जाता है (या सात रंगों/सप्तर्षियों का प्रतीक)।
- स्वरूप: चमकीला, सुनहरा, तेजस्वी, हाथ में कमल या शंख के साथ।
- उन्हें सूर्य, आदित्य, रवि, भानु आदि नामों से भी जाना जाता है।
📖 4. सूर्यदेव का महत्व
- सूर्य पूजा – जीवन और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।
- सूर्य नमस्कार – योग और ध्यान में सूर्य को समर्पित।
- सप्तर्षि और दिन-रात्रि का नियमन।
- पुराणों में प्रमुख देवता – वेदों में उन्हें सर्वश्रेष्ठ देवता कहा गया है।
⚡ 5. सूर्यदेव से जुड़ी प्रसिद्ध कथाएँ
- सावित्री–सत्यवान कथा – यमराज से जुड़े।
- हनुमान और सूर्यदेव – ज्ञान प्राप्ति की कथा।
- अरण्यक और पुराणों में सूर्य की पूजा।
- सूर्य की आराधना से रोग, दुर्भाग्य और बाधाएँ दूर होती हैं।
🛕 6. सूर्यदेव के प्रमुख मंदिर
- कोणार्क सूर्य मंदिर, ओडिशा – 13वीं सदी का अद्भुत मंदिर।
- सूर्य मंदिर, अरुणाचल और मध्यप्रदेश – लोक पूजास्थल।
- रविवार विशेष सूर्य पूजा – भारत के कई स्थानों पर।