सूर्यदेव और संज्ञा / छाया (संज्ञा और छाया कथा)

🔹 कथा सार
- सूर्यदेव ने संज्ञा (या सञ्ज्ञा) से विवाह किया।
- संज्ञा बहुत तेजस्वी थीं और सूर्य का तेज देखकर डर गईं।
- उन्होंने अपनी छाया छाया (Chhaya) बनाई और उसे अपने स्थान पर छोड़ दिया।
- सूर्य ने छाया से शनि देव, यमराज, यमुना जैसे पुत्र प्राप्त किए।
- संज्ञा के पुत्र: मनु, विद्युत्पुत्र आदि।
🔹 महत्व
- यह कथा सूर्य की तेजस्विता और जीवन की ऊर्जा का प्रतीक है।
- सूर्यदेव की तेजस्विता इतनी है कि इंसान या देवता भी इसे सीधे नहीं सह सकते।
2. सावित्री और सूर्यदेव / यमराज कथा
- सावित्री ने यमराज (मृत्यु के देवता) को अपने पति की मृत्यु से रोकने के लिए सूर्यदेव की मदद ली।
- सूर्यदेव ने उसे बुद्धि और शक्ति दी जिससे यमराज को वचन बदलना पड़ा।
🔹 महत्व
- यह कथा सूर्यदेव की दैवी शक्ति और न्यायप्रियता दिखाती है।
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3. हनुमान और सूर्यदेव की कथा
🔹 कथा सार
- बाल हनुमान को ज्ञान प्राप्त करने के लिए सूर्य को अन्न, विद्या और ऊर्जा का देवता माना गया।
- हनुमान सूर्य को “फल और ज्ञान का स्रोत” मानकर ग्रहण करना चाहते थे।
- सूर्य ने हनुमान को आशीर्वाद दिया।
🔹 महत्व
- यह कथा सूर्यदेव को ज्ञान और ऊर्जा के स्रोत के रूप में दर्शाती है।
4. सूर्यदेव और रत्नों की कथा (सूर्य का धन और शक्ति)
- सूर्यदेव के रथ में सात घोड़े हैं।
- इन घोड़ों का प्रतीक है सप्त रंग और सप्त ऊर्जा केंद्र।
- वे सात दिनों और सात ग्रहों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।
🔹 महत्व
- यह कथा सूर्य के प्रकाश, समय और जीवन ऊर्जा का प्रतीक है।
5. सूर्यदेव और सूर्यनमस्कार कथा
- वेदों में वर्ण है कि सूर्य की आराधना और प्रणाम करने से सूर्य से शक्ति, स्वास्थ्य और आत्मबल प्राप्त होता है।
- ऋषियों ने सूर्य की पूजा को सूर्य नमस्कार के रूप में प्रचलित किया।
🌟 सूर्यदेव का महत्व
- जीवन और प्रकाश का स्रोत।
- स्वास्थ्य, ऊर्जा और ज्ञान के देवता।
- समय, ऋतुओं और दिन-रात्रि के नियंत्रक।
- आराधना से रोग, दुर्भाग्य और संकट दूर होते हैं।